कबीर की विशेषताएँ-
उत्तर - फक्कड़ाना स्वभाव
मस्ती
वाणी
तेज
*(ii) कबीर जिज्ञासु थे,.......
(अ) मिथ्या के। (ब) सत्य के। (क) कथ्य के।
उत्तर-सत्य के
* (1) संजाल पूर्ण कीजिए
मस्त-मौला के लक्षण -
उत्तर-(1)वर्तमान कर्मों को सर्वस्व न समझना
(2)प्रेम का मतवाला होना
(3)पुराने कृत्यों का हिसाब न रखना
(4)भविष्य में सबकुछ झाड़- फटकार निकल जाना
कृति 2 : (स्वमत अभिव्यक्ति)
* 'कबीर संत ही नहीं समाज सुधारक भी थे' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर : कबीर का नाम संत कवियों में लिया जाता है। कबीर ने ईश्वर एवं ईश्वर भक्ति पर तो लिखा ही है, उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और विषमताओं पर गहरी चोट की है। कबीर के काल में समाज में अनेक विकृतियाँ फैली हुई थीं। तरह-तरह के अंधविश्वास प्रचलित थे। जाति प्रथा की कुरीतियों से लोग त्रस्त थे। धर्म को लेकर कट्टरता का बोलबाला। लोगों में आपसी भेद-भाव जोरों पर था। तरह-तरह के बाह्याडंबर प्रचलित थे। कबीर ने इन सब का जोरदार विरोध किया। वे सामान्य जनता से जुड़े हुए थे। समाज में व्याप्त सभी बुराइयों पर उन्होंने बिना लाग-लपेट प्रहार किया है। इस तरह कबीर ने अपने काव्य के माध्यम से समाज- -सुधार का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।
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