दूसरी इकाई
1. गागर में सागर
1) निंदक नियरे राखिए' इस पंक्ति के बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर : निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना निर्मल करे सुभाय। अर्थात जो व्यक्ति हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिक से अधिक पास रखना चाहिए। संभव हो तो अपने आँगन में ही उसकी कुटी बना लेनी चाहिए। उसके पास रहने से हम साबुन और पानी के बिना ही अपने स्वभाव को निर्मल बना सकते हैं। वह हमारे दोषों को हमारे सम्मुख प्रकट करता रहेगा, तो हम अपने उन दोषों को दूर कर सकेंगे। ऐसे लोग अनजाने में ही हमारी भलाई कर जाते हैं। प्रायः व्यक्ति अपने दोषों को अपने आप नहीं जान पाता। चापलूस लोग अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर हमारे अवगुणों की भी प्रशंसा करते रहते हैं। इस कारण हमें अपना व्यवहार सदैव उत्तम ही लगता है।
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