हिंदी. १. भारत महीमा
कृति 1 : (आकलन)
(1) नाम लिखिए:
कविता में प्रयुक्त दो धातुओं के नाम-
- लोहा
- स्वर्ण
(5) निम्नलिखित पंक्तियों का तात्पर्य लिखिए:
(i) कहीं से हम आए थे नहीं।
- हम भारतवासी किसी अन्य देश से आकर यहाँ नहीं बसे। हम यहीं के निवासी हैं। सभ्यता के प्रारंभ से हम यहीं रहते आए हैं।
कृति 1 : (आकलन)
(1) आकृति पूर्ण कीजिए :
भारतीय संस्कृति की दो विशेषताएँ -
- दानशीलता
- अतिथि सत्कार
(2) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :
संचय सत्य अतिथि रल वचन दान हृदय तेज देव
(i) संचय - दान
(ii) सत्य - वचन
(iii) अतिथि - देव
(iv) रत्न - तेज ।
निम्नलिखित पंक्तियों का तात्पर्य लिखिए, :
(i) वही हम दिव्य आये संतान ।
- भारतवासी आर्य थे और हम उन्हीं आयों की दिव्य संतानें हैं।
(ii) किसी को देख न सके विपन्ना
- भारतीय कभी किसी को दुखी नहीं देख सके। दीन-दुखियों की सेवा करने के लिए हम भारतीय सदैव तत्पर रहते हैं।
• निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
(1) रचनाकार का नाम → जयशंकर प्रसाद।
2) रचना की विधा → कविता ।
(3) पसंद की पंक्तियाँ → व्योमतम पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।
(4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण → भारतीयों ने पूरे विश्व में ज्ञान का प्रसार किया, जिसके कारण समग्र संसार आलोकित हो गया। अज्ञान रूपी अंधकार का विनाश हुआ और संपूर्ण सृष्टि के सभी दुख-शोक दूर हो गए।
(5) रचना से प्राप्त संदेश / प्रेरणा → हमें सदैव अपने देश और इसकी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। जब भी आवश्यकता पड़े, देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
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