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पहिली ते दहावी संपूर्ण अभ्यास

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Thursday, 15 January 2026

दहावी हिंदी,९. जब तक जिंदा राहू. लिगता राहू

 ९. जब तक जिंदा राहू. लिगता राहू



कृति 1: (आकलन)


(1) कृति पूर्ण कीजिए : 


अमृतलाल नागर जी| के साहित्य - सृजन में सहायक 


 

 लेखक       - 1. सनेही जी   , 2. अयोध्यासिंह उपाध्याय

 


 पत्रिकाएँ      - 1. सरस्वती  , 2. गृहलक्ष्मी







(2) उत्तर लिखिए: : 



(i) नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित करने वाला अनुभव 


     -  सन 1928 - 1929 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय 1 किए गए लाठी चार्ज के अनुभव ने नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित किया।








कृति 2 : (आकलन)


(3) उचित जोड़ियाँ मिलाइए


          रचना                         रचना कार


(i) देशी और विलायती   -  प्रभातकुमार मुखोपाध्याय -   


(ii) आनंदमठ           -      बंकिमचंद्र चटर्जी



(iii) अपशकुन        -    अमृतलाल नागर



(iv) देवी चौधरानी     -    बंकिमचंद्र चटर्जी







(1) उत्तर लिखिए : 



(i) नागर जी अपने पिता जी के इस गुण से प्रभावित थे.


   - किसी के दुख-दर्द में तुरंत पहुँचने का गुण ।






कृति 2 : (आकलन) 


 (1) आकृति पूर्ण कीजिए : 

 

    नागर जी का पहला उपन्यास -

    

    नाम -   माहाकाल

 



प्रकाशन वर्ष   -   १९४४







(2) तद्धित शब्दों का मूल शब्द लिखिए :


(i) साहित्यिक   -   साहित्य 


(ii) विलायती   -   विलायत


 (iii) प्रभावित   -   प्रभाव

 

 (iv) सामाजिक  -   समाज






कृति 4 : (स्वमत अभिव्यक्ति) 


• ज्ञान तथा आनंद प्राप्ति का साधन वाचन' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 

 

  उत्तर : कहते हैं, पुस्तक मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र होती है। पुस्तकों में ज्ञानभरी बातें होती हैं। किताबों में संचित ज्ञान हमारे लिए, सहायक होता है। विभिन्न विचारकों, लेखकों तथा महान व्यक्तियों के विचार पुस्तकों में ही संग्रहित होते हैं। हमारे यहाँ साहित्य, तकनीक, विज्ञान, धर्म, राजनीति आदि सभी विषयों से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। आवश्यकता है इन्हें पढ़ने में रुचि रखने की। पुस्तकें पढ़ने से ज्ञान प्राप्ति के साथ-साथ अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है। कोई भी मनुष्य हर दृष्टि से परिपूर्ण नहीं होता। मनुष्य बहुत सारी बातें देख-सुन और पढ़कर सीखता है। विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों से ज्ञानार्जन करता है। बड़े होने पर इन पुस्तकों से उसका काम नहीं चलता। उसे ज्ञानार्जन के लिए, और खुराक की आवश्यकता होती है। वह अपने पसंद वाले विषयों की पुस्तकें पढ़ता है। आई.सी.एस., आई.पी.एस. तथा आई.ए.एस. जैसी बड़ी-बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए भी वाचन की आवश्यकता होती है। पुस्तकों में क्या नहीं है? इसमें जो जितने गोते लगाता है, उसे उतना ही ज्ञान प्राप्त होता है। 







 (1) संजाल पूर्ण कीजिए : 

 

     नागर जी के समकालीन साहित्यकार - 


       - जगन्नाथदास रत्नाकर

 

      - शरतचंद्र


      - प्रेमचंद

 

      - माधव शुक्ल






(ii) प्राचीन साहित्यकारों में नागर जी के आदर्श रचनाकार और उनकी रचना 


    रचनाकार    -    तुलसीदास 

    


      रचना    -    रामचरितमानस







कृति 2: (आकलन) 



(1) आकृति पूर्ण कीजिए :



   (iv) नागर जी के प्रिय आलोचक  - पाठकीय प्रतिक्रियाएँ देने वाले पत्र लेखक






कृति 3 : (शब्द संपदा)



  (i) खिंचाव     -     खिंच   + आव



   (ii)  लिखावट   -  लिख   +  आवट 




  

गद्यांश क्र. 4



कृति 1: (आकलन) (1) उत्तर लिखिए : 


(i) नागर जी के समय के लेखकों में उनकी पसंद के लेखक


   -  रामविलास शर्मा ।



(iii) अपनी इस रचना के लिए नागर जी को बहुत लोगों से मिलना पड़ा   


   -  'गदर के फूल' ।






(2) आकृति पूर्ण कीजिए :


   नागर जी के प्रिय विदेशी लेखक - 



    - टॉल्स्टॉय


    - चेखव






कृति 2: (आकलन) 


(1) लिखिए : 



         कार्य


   आलोचक    -   समीक्षा करना 

   

    रचनाकार    -  रचना करना

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