९. रुढ की हड्डी
कृति 1 : (आकलन)
(1) संजाल पूर्ण कीजिए :
रिश्ते
रामस्वरूप- उमा - पिता-पुत्री
नौकर- मालिक - रतन- रामस्वरूप
शंकर-गोपाल प्रसाद - पिता-पुत्र
रामस्वरूप- प्रेमा - पति-पत्नी
(2) आकृति पूर्ण कीजिए :
(i) व्यावसायिक शिक्षा के नाम -
- वकील
- मेडिकल
(ii) शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त वाद्यों के नाम
- हारमोनियम
- सितार
कृति 2 : (आकलन)
(1) कारण लिखिए :
(i) उमा मेहमानों के सामने जरा करीने से आए
- गोपाल प्रसाद खूबसूरत बहू चाहते थे।
(ii) रामस्वरूप ने हारमोनियम उठाकर लाने को कहा -
- रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद और शंकर को दिखाना चाहते थे कि उनकी लड़की हारमोनियम बजाना जानती है।
कृति 3 : (शब्द संपदा)
(3) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म पूर्ण कीजिए।
(i) पढ़े - लिखे
(ii) सभा - सोसायटी
(iii) ठीक - ठाक
(iv) धीरे - धीरे।
कृति 1 : (आकलन)
(1) आकृति पूर्ण कीजिए :
गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू ऐसी हो -
- खूबसूरत हो।
- सिलाई- पुराई जानती हो ।
- अधिक पढ़ी-लिखी न हो।
- चश्मा न पहनती हो।
कृति 1 : (आकलन)
(1) कारण लिखिए :
(i) बाप-बेटे चौंक उठे - उन्होंने उमा के चेहरे पर सुनहरी
रिमवाला चश्मा देखा।
(ii) उमा को चश्मा लगा - पिछले महीने उमा की आँखें
दुखने लगी थीं।
कृति 3 : (शब्द संपदा)
(3) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म पूर्ण कीजिए :
(i) पेंटिंग - वेंटिंग
(ii) गाना - बजाना
(iii) पढ़ाई - वढ़ाई
(iv) इनाम - बिनाम।
(2) कारण लिखिए :
• (ii) उमा को गुस्सा आया
- गोपाल प्रसाद उमा के चश्मे, उसके गाने-बजाने, पेंटिंग, सिलाई और उसकी पढ़ाई आदि के बारे में एक के बाद एक प्रश्न करते जा रहे थे।
कृति 3 : (शब्द संपदा)
(1) कृदंत बनाइए :
(i) पढ़ना – पढ़ाकू
(ii) समझना - समझदार
(iii) सीना - सीनेवाला
(iv) चाहना - चाहत।
(4) शब्द-युग्म पूर्ण कीजिए :
सीधा - सादा |
कृति 4 : (स्वमत अभिव्यक्ति)
• सुनी-पढ़ी अंधविश्वास की किसी घटना में निहित आधारहीनता और अवैज्ञानिकता का विश्लेषण करके लिखिए।
उत्तर : मेरी दादी बड़ी अंधविश्वासी हैं। उनका मानना था कि कोई घर से बाहर जा रहा हो और किसी को छींक आ जाए तो जाने वाले का काम पूरा नहीं होगा। किसी के बाहर जाते समय कोई छींक दे तो दादी बाहर जाने वाले को रोक देती थीं। घर के सभी लोग उनकी इस आदत से परेशान थे। एक बार मेरे भाई को इंटरव्यू के लिए बाहर जाना था। यह इंटरव्यू हमारे जिले के सर्वश्रेष्ठ स्कूल में वाइस प्रिंसिपल के पद के लिए था। भाई काफी दिनों से इसके लिए तैयारी और प्रतीक्षा कर रहे थे। मुझे बहुत खाँसी-जुकाम हो रहा था। जैसे ही भाई ने बैग उठाकर चलना चाहा, मुझे जोर-जोर से छींकें आने लगीं। दादी ने भाई को जाने नहीं दिया और उनका वह महत्त्वपूर्ण इंटरव्यू छूट गया। घर के सभी लोग इस घटना से बहुत दुखी हुए। मैंने दादी को समझाया कि छींक एक स्वाभाविक क्रिया है। जुकाम होने पर नाक में एक प्रकार की सरसराहट होती है। नाक में मौजूद नर्व सेल इसका संकेत मस्तिष्क को भेजते हैं। मस्तिष्क इसकी प्रतिक्रिया में चेहरे, गले और छाती की मांसपेशियों को सक्रिय कर देता है, जिसके फलस्वरूप ये सब मिलकर तेज हवा निकालकर बाहरी कणों को बाहर फेंक देते हैं। यही क्रिया छींक है। दादी के मन में भी भाई के इंटरव्यू को लेकर अफसोस था। उन्होंने मेरी बात समझी और धीरे-धीरे अपनी इस आदत को छोड़ दिया।
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